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लेखनी कहानी -12-Jan-2026

बुझता हुआ चिराग़ जलाया है रात भर। क्या डर था उस को जिसने डराया है रात भर।

साया ही उसका जिस्म पर तो सायबान था। पर रूह को तलाश न पाया है रात भर।

आंखें तेरी बता रही बेचैन कितनी थी। वह भी कहां सुकून से सोया है रात भर।

परदेस को चला गया वह कह के अलविदा। पर मुझको याद करके वह रोया है रात भर।

होती है ग़म ए हिज्र बताएं "सगी़र" क्या? रस्में वफ़ा की शम्मा जलाया है रात भर।

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1 Comments

Pranav kayande

17-Jan-2026 01:22 PM

Great

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